Thursday, 6 February 2014

सपनो मे जा पंहुचा मैं मधुशाला



एक दिन छुटपन के सपनो मे जा पंहुचा मैं मधुशाला !!


ना मुझे शहद मिली, ना मिली कोई हाला !



रिझाती हाँथ पकड़कर मेरा वहा एक चंचल मधुबाला !


एक दिन छुटपन के सपनो मे जा पंहुचा मैं मधुशाला !!



पैमाने पैमानो से छलक रहे थे, मदहोश थी मधुशाला !


एक दिन छुटपन के सपनो मे जा पंहुचा मैं मधुशाला !!





कोई रोता कोई हस्ता बेबाक थी मधुशाला !


एक दिन छुटपन के सपनो मे जा पंहुचा मैं मधुशाला !!



दुःख की नदियाँ सुख के गोते खेल खिलाती मधुशाला !


एक दिन छुटपन के सपनो मे जा पंहुचा मैं मधुशाला !!


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