Thursday, 30 January 2014

घोटालो को देखकर दिया आम आदमी रोए


घोटालो को देखकर दिया आम आदमी रोए ,

सोना चांदी लुट गया , कोयला भी अब चोरी होए !



घोटालो की जैसे बाढ़ है आयी,

किसी ने 10 तो किसी ने 100 लाख करोड़ की लुटिया डुबोई !



अंधेर नगरी अनबुझ राजा,

टके शेर भाजी टके शेर खाजा !



गरीब का तो हाल बेहाल है,

नेताजी को सिर्फ बच्चो और बैंक बैलेंस का खयाल है !



काम नहीं करने को तो चोरी करवाते है

देश का पैसा बंदरो की तरह आपस में बाँट कर खाते है !



घोटालो को देखकर दिया आम आदमी रोए ,

सोना चांदी लुट गया , कोयला भी अब चोरी होए !



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