Monday, 13 January 2014

मन मुस्करता


जब सावन घिर के आता है, मन मुस्करता है !
जब ठंडी हवा मचलती है, मन मुस्करता है !





जब समंदर गोते खाता है, मन मुस्करता है !
जब पंक्षी डालो पर चहकते है, मन मुस्करता है !




जब कोई प्यार का राग बजाता है, मन मुस्करता है !
जब जीवन मधुर हो जाता है, मन मुस्करता है !




जब गीत मल्हार गाता है, मन मुस्करता है !
जब सावन घिर के आता है, मन मुस्करता है !


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