Saturday, 8 June 2013

बादल आज कई दिनों के बाद रोया


दूर गगन में कही था अब तक खोया !
बादल आज कई दिनों के बाद रोया !!

बदल रोता, 
मै मुस्कुराता हु !
वो गम बताता, मै खुशिया मनाता हु !!

बादल के आंसू ने सारा जग भिगोया !
बादल आज कई दिनों के बाद रोया !!

अब बादल रोता मई हँसता नहीं था !
उसके आंसू पर मज़ा कसता नहीं था !!

बदल के आंसू ने हरियाली का मंजर लाया !
सपनो सा था दर्पण, जग को आंसू ने चमकाया !!

बादल ने जैसे रोने की जिद थी ठानी !
उसके आंसू धरती पर कर रहे थे मनमानी !!

अब बादल रोता तो मै भी रोता हु !
अपने सपने उसके आंसू से भिगोता हु !!

हरियाली का मंजर जैसे उजड़ा, कही खोया !
बादल आज कई दिनों के बाद रोया !!

कुछ महीने बीते बादल मन गया !
अपने आंसू को थामना जैसे जान गया !!

अब बदल मुस्कुराता, मै मुस्कुराता हु !
रोने पर किसी के न हँसना सबको समझाता हु !!

दूर गगन में कही था अब तक खोया !
बादल आज कई दिनों के बाद रोया !!



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